नई दिल्ली: राजस्थान में तेजी से बढ़ते घटनाक्रम में सीएम अशोक गहलोत ने राज्यपाल से मुलाकात की और भाजपा पर सचिन पायलट व अन्य लोगों को लुभाने का आरोप लगाया। सचिन पायलट और दो अन्य कैबिनेट मंत्रियों को बर्खास्त करने के बाद पहली बार मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में कोई ऐसी पार्टी नहीं रही है, जिसने भाजपा की तुलना में अधिक अलोकतांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल किया हो। गहलोत ने कहा कि कांग्रेस ने सचिन पायलट और उनके वफादारों को दो मौके दिए।
इस बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा आपात बैठक के लिए अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के 10 जनपथ नई दिल्ली स्थित आवास पर पहुंचीं। बर्खास्त होने के बाद सचिन पायलट की तरफ से ट्विटर पर पहली प्रतिक्रिया आई है, जिसमें उन्होंने कहा कि सच्चाई को परेशान किया जा सकता है, लेकिन इसे लंबे समय तक चुप नहीं किया जा सकता है।
कांग्रेस की दौसा इकाई ने दिया इस्तीफा
सचिन पायलट और उनके वफादार कैबिनेट मंत्रियों को बर्खास्त करने के कुछ ही समय बाद पार्टी की पूरी दौसा इकाई ने इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा, राज्यपाल ने राजस्थान के डिप्टी सीएम के रूप में सचिन पायलट को हटाने की बात स्वीकार की।
अशोक गहलोत ने राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात की
मंगलवार को कांग्रेस विधायक दल की दूसरी बैठक के बाद कांग्रेस पार्टी ने सचिन पायलट और उनके वफादारों के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला ने घोषणा की कि पायलट और दो अन्य कैबिनेट मंत्रियों को राजस्थान सरकार से बर्खास्त कर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के कारण पायलट ने कम उम्र में बहुत कुछ हासिल किया, हालांकि वह भाजपा के प्रयासों से फंस गए हैं।
मंगलवार को जैसा ही कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने घोषणा की कि सचिन पायलट, विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को गहलोत सरकार में उनके पद से हटा दिया गया है, सचिन पायलट के खेमे ने कहा कि वे लालच नहीं कर रहे हैं और अपनी गरिमा व खुद के लिए लड़ रहे हैं।
सचिन पायलट खेमे का बयान
कांग्रेस पार्टी की तरफ से सचिन पायलट और उनके वफादारों को हटाने का प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद पायलट खेमे ने एक बयान जारी किया। अपने बयान में उन्होंने कहा है कि पायलट के नेतृत्व में उन्होंने पार्टी को मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास किया है। उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान में कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए पायलट शिविर ने पिछले 6 वर्षों में बहुत मेहनत की है।
विश्वेंद्र सिंह, रमेश मीणा और दीपेंद्र शेखावत द्वारा दिए गए बयान में कहा गया है कि अपने नेता को दरकिनार करने के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह होना होगा। बयान में कहा गया है, “हमारे नेता पायलट का सार्वजनिक अपमान हमारे लिए पूरी तरह से अस्वीकार्य है और इस इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। बयान में कहा गया है कि पायलट खेमा किसी भी पद और पदों की मांग नहीं कर रहा है और केवल आत्म-सम्मान बहाल करना चाहता है।
राजस्थान राजनीतिक संकट: पायलट बनाम गहलोत
राजस्थान में कांग्रेस के बीच अनबन तब सामने आई जब राज्य के विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने राज्य सरकार को गिराने करने के लिए भाजपा नेताओं की कथित संलिप्तता के संबंध में सीएम और डिप्टी सीएम सहित कई विधायकों को नोटिस जारी किए। घटना के बाद सीएम अशोक गहलोत ने कोविड-19 संकट के बीच भाजपा पर उनकी सरकार को गिराने का प्रयास करने का आरोप लगाया। एक दिन बाद 11 जुलाई को डिप्टी सीएम सचिन पायलट अपने कुछ समर्थक विधायकों के साथ दिल्ली गए और सूत्रों ने कहा कि वह भाजपा के संपर्क में हैं। सूत्रों ने यह भी कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के साथ उनकी बैठक है।
इस बीच गहलोत ने जयपुर में अपने निवास में सभी विधायकों को इकट्ठा किया, जिन्होंने उनका समर्थन किया। 13 जुलाई को अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पायलट ने कहा कि न केवल उनके साथ विधायक हैं, बल्कि वे राजस्थान के लोगों के साथ भी हैं। इसके अलावा पायलट सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया से दिल्ली में मिले, जोकि कांग्रेस के खेमे में खतरे की घंटी थी। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों के बाद कि पायलट के बीजेपी में शामिल होने की संभावना को नकार दिया।
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