विशाल एंग्रीश, चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कैबिनेट बैठक में अपने कैबिनेट के साथियों को एक बार फिर से चेताया कि आने वाले 4 हफ्तों में पंजाब में कोरोना की स्थिति भयावह हो सकती है और हर स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश सरकार को तैयार रहना पड़ेगा। लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह की इसी आशंका को लेकर पंजाब की सियासत भी गरमा गई।
अगर हम आंकड़ों पर भी नजर डालें तो पंजाब के पास ऐसी सुविधाएं नहीं है, जो ये बात सुनिश्चित करती हो कि अगर प्रदेश में हालात दिल्ली या महाराष्ट्र जैसे राज्यों के बराबर पहुंचे तो पंजाब अपने स्वास्थ्य संसाधनों के मुकाबले उस स्थिति से मुकाबला कर सकेगा। अगर हम पंजाब सरकार के अधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो पंजाब में सिर्फ तीन सरकारी मेंडिकल कॉलेज है, जहां पर कोरोना से मुकाबला करने के लिए युद्ध स्तर पर इंतजाम करने का दावा किया जा रहा है।
इन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 1045 ऑक्सीजन बेड हैं जबकि महज 99 वेंटिलेटर हैं। प्रदेश में अगर प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की बात करें तो सिर्फ 6 ही प्राइवेट मेडिकल कॉलेज है, जहां पर कोविड से निपटने के लिए 46 ऑक्सीजन बेड और 90 वेंटिलेटर है। जबकि अगर पंजाब के तमाम प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों और नर्सिंग होम के वेंटिलेटर की संख्या जोड़ ली जाए तो वेंटिलेटरों की कुल संख्या सिर्फ 235 है, जिसमें प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों और करीब 212 निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के वेंटिलेटर भी शामिल है।
अगर हम पूरे पंजाब की स्थिति को देखें तो पंजाब के पास महज 2144 ऑक्सीजन बेड है जबकि प्राइवेट और सरकारी वेंटिलेटर की संख्या मिलाकर ही 235 है। हालांकि पंजाब सरकार का दावा है कि इस वक्त प्रदेश में सिर्फ 3% वेंटिलेटर ही इस्तेमाल हो रहे हैं और करोना मरीजों में से सिर्फ 3% यानि 57 लोग ही ऑक्सीजन बेड पर हैं। जबकि 6 लोग वेंटिलेटर पर है। इस वक्त पंजाब में टोटल एक्टिव मरीज 1900 के आसपास हैं।
पंजाब सरकार का दावा है कि अगर इसी दर से करोना का ग्राफ बढ़ा तो प्रदेश के पास अभी 40 गुना ज्यादा सुविधाएं मौजूद हैं। लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अगले चार हफ्तों में प्रदेश की स्थिति बिगड़ने की बात कर रहे हैं तो ऐसे में इन सीमित संसाधनों के साथ करोना से आखिरकार कैसे निपटा जाएगा यही बड़ा सवाल है।
विपक्षी पार्टियां भी यही सवाल कर रही हैं कि लगातार कैप्टन अमरिंदर सिंह ये बात तो कहते रहे हैं कि जुलाई, अगस्त और सितंबर इन तीन महीनों में प्रदेश में करोना विस्फोट होगा और स्थिति भयावह हो सकती है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने अब तक अपने सीमित स्वास्थ्य संसाधनों को बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए हैं। अकाली दल के प्रवक्ता चरणजीत बराड़ ने कहा कि सिर्फ बातें करने से कुछ नहीं होगा बल्कि जमीनी स्तर पर पंजाब सरकार को अपने संसाधनों को बढ़ाना होगा। आम आदमी पार्टी के नेता विपक्ष हरपाल चीमा ने भी कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को अगर महीनों पहले ये अंदेशा हो गया था कि प्रदेश में अगस्त-सितंबर के महीनों में कोरोना की स्थिति भयावह हो सकती है तो उन्होंने अपने सीमित स्वास्थ्य संसाधनों को बढ़ाने के लिए आखिरकार क्या किया।
हालांकि कागजों में पंजाब सरकार के पास संसाधन भले ही सीमित हों, लेकिन पंजाब सरकार के प्रवक्ता राजकुमार वेरका ने दावा किया कि जमीनी स्तर पर पंजाब सरकार की पूरी तैयारी है। करोना से बनने वाली हर भयावह स्थिति को लेकर कैप्टन अमरिंदर सिंह खुद हालात पर नजर रखे हैं और हर स्थिति से निपटने के लिए पंजाब सरकार पूरी तरह से तैयार है।
ऐसा पहली बार नहीं है कि जब पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आने वाले महीनों में करोना की स्थिति बिगड़ने की आशंका जताई हो। लेकिन अगर पंजाब के स्वास्थ्य संसाधनों पर नजर डाली जाए तो ये संसाधन अब भी उतने ही हैं, जितने करोना की भारत में शुरुआत के वक्त थे। इसी वजह से विपक्षी पार्टियां सवाल कर रही है कि बयान देने के अलावा सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जमीनी स्तर पर संसाधनों को बढ़ाने के लिए क्या तैयारियां की हैं।
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