नई दिल्ली: सियासी हलचल के बीच राजस्थान बीजेपी के नेताओं ने गहलोत सरकार से बहुमत साबित करने को कहा है। नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद्र कटारिया ने मांग की है कि सीएम अशोक गहलोत मंत्रिमंडल विस्तार करने से पहले सदन में अपना बहुमत साबित करें। बीजेपी के नेताओं ने दावा किया है कि गलहोल सरकार अल्पमत में है।
राजस्थान में तेजी से बढ़ते घटनाक्रम में सीएम अशोक गहलोत ने राज्यपाल से मुलाकात। सचिन पायलट और दो अन्य कैबिनेट मंत्रियों को बर्खास्त करने के बाद पहली बार मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में कोई ऐसी पार्टी नहीं रही है, जिसने भाजपा की तुलना में अधिक अलोकतांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल किया हो। गहलोत ने कहा कि कांग्रेस ने सचिन पायलट और उनके वफादारों को दो मौके दिए।
कांग्रेस की दौसा इकाई ने दिया इस्तीफा
सचिन पायलट और उनके वफादार कैबिनेट मंत्रियों को बर्खास्त करने के कुछ ही समय बाद पार्टी की पूरी दौसा इकाई ने इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा, राज्यपाल ने राजस्थान के डिप्टी सीएम के रूप में सचिन पायलट को हटाने की बात स्वीकार की।
सचिन पायलट खेमे का बयान
कांग्रेस पार्टी की तरफ से सचिन पायलट और उनके वफादारों को हटाने का प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद पायलट खेमे ने एक बयान जारी किया। अपने बयान में उन्होंने कहा है कि पायलट के नेतृत्व में उन्होंने पार्टी को मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास किया है। उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान में कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए पायलट शिविर ने पिछले 6 वर्षों में बहुत मेहनत की है।
विश्वेंद्र सिंह, रमेश मीणा और दीपेंद्र शेखावत द्वारा दिए गए बयान में कहा गया है कि अपने नेता को दरकिनार करने के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह होना होगा। बयान में कहा गया है, “हमारे नेता पायलट का सार्वजनिक अपमान हमारे लिए पूरी तरह से अस्वीकार्य है और इस इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। बयान में कहा गया है कि पायलट खेमा किसी भी पद और पदों की मांग नहीं कर रहा है और केवल आत्म-सम्मान बहाल करना चाहता है।
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